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लखनऊ। कोरोना वायरस का दंश पूरी दुनिया झेल रही है लेकिन इसकी चोट सबसे ज्यादा ऐसे तबके पर पड़ रही है जिनकी रोजी-रोटी का जरिया रोज कीकमाई है। मनरेगा मजदूरों सहित विभिन्न तबके के ऐसे लोगों की मदद के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार सीधे उनके खाते में पैसा डाल रही है। सरकार कीकल्याणकारी योजनाओं से मरहूम एक तबका है कर्मकांडी पंडितों का। काशी हो या प्रयागराज,ऐसे कर्मकांडी पंडितों की संख्या एक लाख से ऊपर है जोदेश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों को पूजा-पाठ कराकर ही घर चलाते हैं। इनके पूजा-पाठ से मिले दक्षिणा से न सिर्फ परिवार चलता है बल्कि नवरात्र केसमय तो अतिरिक्त कमाई से सालभर का घरेलू अर्थशास्त्र बैठाने का काम करते हैं। कोरोना के कारण देश में हुए लॉकडाउन से कर्मकांडी पंडितों कीकमाई न सिर्फ बंद हो गयी है बल्कि आर्थिक संकटों को भी सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस ऐसे पंडितों की 21 दिन कमाई ही नहीं निगला बल्किसलाना बजट को भी चोट पहुंचा दिया है।
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विश्व की धार्मिक नगरी काशी,तीर्थराज प्रयाग, विंध्याचल,अयोध्या,मथुरा सहित प्रदेशभर में ऐसे कर्मकांडी पंडितों की संख्या एक लाख से ऊपर है जो पूजा-पाठ कराकर ही घर-गृहस्थी चलाते हैं। नवरात्र के दिनों में यह कर्मकांडी पंडित कई घरों में नौदुर्गा का पाठ करके होने वाली अतिरिक्त कमाई से बच्चों कोपढ़ाने-लिखाने से अपनी अन्य जरूरतों का पूरा करते हैं। कोरोना महामारी के चलते ऐसे कर्मकांडी पंडितों के समक्ष फांकाकशी की नौबत खड़ी हो गयी है।केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से जिस तबके के लिए इस महामारी के संकटकाल में मदद की घोषणा हुई है,उसमें जाति के कारण फिट नहीं बैठने से कईघरों में तो स्थिति बहुत बुरी है।
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काशी में ऐसे कर्मकांडी पंडित लॉकडाउन के दौरान किस तरह की दिक्कतों को महसूस कर रहे हैं, यह जानने का प्रयास किया गया। काशी के कर्मकांडी पंडित नीरज मिश्रा ने कहा कि हमारी रोटी का जरिया काशी-विश्वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन करानेसे लेकर गंगापूजन से मिली दक्षिणा ही है। नवरात्र के समय पांच-छह घरों में कलश स्थापना से लेकर नियमित पाठ तक होने से वाली अतिरिक्त दक्षिणा सेघर-परिवार के सलाना गुजारा का बजट बनता है। कोरोना इस बार पंडितों की कमाई खा गया,बाबा विश्वनाथ ही बेड़ा पार करें। कुछ ऐसा ही दर्द पंडित अतुलशर्मा का भी है। काशी विश्वनाथ सहित प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन की दक्षिणा से रोजाना रोटी के साथ नवरात्र में अतिरिक्त श्रम करके मिले दक्षिणा से मां-बाप व बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए जो ख्वाब बुनते हैं,कोरोना खा गया। बाबा ही कल्याण करें,पंडित होने के नाते सरकार शायद हम सबका दर्द सुनें। कुछऐसा ही दर्द पंडित अविनाश ओझा का भी है। बोले एक सप्ताह हो गया है एक रुपए भी दक्षिणा नसीब नहीं हुई हैं। कोरोना जान से पहले पूरे परिवार के पेटकी अंतड़ियों को काटने का काम कर रहा है। बाबा विश्वनाथ कोरोना का अंत करें ताकि देश में हमारे जैसे लाखों पंडितों के घर आर्थिक संकट दूर हो सके।